पेट्रोल–ड़ीजल के दाम में भारी कटौती के संकेत

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पेट्रोल–ड़ीजल के दाम में भारी कटौती के संकेत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के भाव में व्यापक कटौती के बावजूद खुदरा बाजार में मामूली कम। होली के बाद कच्चे तेल की कीमत की समीक्षा के बाद खुदरा बाजार में अधिक कमी की उम्मीद। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का फायदा खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को मिलने के आसार हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को इसका लाभ मामूली रूप से मिला है लेकिन होली के बाद पेट्रोल–ड़ीजल की कीमतों में भारी कटौती होने की उम्मीद है। पेट्रोल–ड़ीजल के दामों में प्रति लीटर यह कमी पैसे के बजाय रुपए में हो सकती है। हालांकि पेट्रोल–ड़ीजल की कीमतों में अधिक गिरावट से राज्य सरकारों को पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट के रूप में मिलने वाली धनराशि में भी कमी आएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को ३० फीसद गिरावट आई है। इतनी बड़़ी गिरावट कई बर्षों बाद हुई है। कच्चे तेल का भाव २२१६ रुपए प्रति बैरल पर आ गया है। दरअसल तेल उत्पादक देशों के बीच उत्पादन को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण प्रमुख तेल निर्यातक सऊदी अरब ने कीमतों में भारी कटौती का ऐलान किया। इस वजह बाजार में कच्चे तेल की कीमत में ३० फीसद कमी आई है। इस गिरावट का सीधे तौर पर फायदा भारतीय बाजार में खुदरा उपभोक्ताओं को नहीं मिला है। सोमवार को तेल विपणन कम्पनियों ने मामूली कमी की है। तेल विपणन कंपनियों ने दिल्ली में पेट्रोल के दाम में प्रति लीटर २४ पैसे और ड़ीजल के दाम में २५ पैसे की कमी की है। इससे पेट्रोल ७०.५९ रुपए प्रति लीटर पर आ गया है जबकि ड़ीजल ६३.२६ रुपए प्रति लीटर पर आ गया है। इस आधार पर अन्य शहरों में भी पेट्रोल और ड़ीजल के दामों में मामूली कमी आई है। तेल विपणन कंपनी आईओसी के अनुसार एक मार्च को पेट्रोल और ड़ीजल की कीमतें खुदरा बाजार के लिए गई थी। इसमें पेट्रोल का बेसिक दर ३२.६१ रुपए और ड़ीजल का बेसिक दर ३६.२१ रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया गया था। इस बेसिक दर के अलावा भाड़़ा‚ एक्साइज ड्यूटी‚ ड़ीलर कमीशन‚ वैट आदि लगाकर पेट्रोल के दाम ७१.७१ रुपए और ड़ीजल के दाम ६४.३० रुपए प्रति लीटर तय किए गए थे। कुल मिलाकर पिछले नौ दिनों में पेट्रोल और ड़ीजल के दाम में खुदरा बाजार में मामूली कमी है‚ लेकिन जिस तरह से आज कच्चे तेल की कीमत में ३० फीसद तक कमी आई है। उससे खुदरा बाजार में बड़़ी गिरावट के आधार हैं। होली के बाद तेल विपणन कम्पनियां कच्चे की कीमत और बुधवार को बाजार के खुलने के बाद इसकी समीक्षा करेंगी। इसके बाद बाजार कर रुख अनुकूल रहा तो खुदरा बाजार में कीमतें कम होंगी। लेकिन इसके साथ–साथ वैट को लेकर राज्य सरकारों के खाते में कमी आ सकती हैं क्योंकि सभी राज्यों में वैट का फीसद अलग–अलग है।

image : Designed by macrovector / Freepik

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