क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत का अधिकार समर्पण कर दिया है? मोदी सरकार से असदुद्दीन ओवैसी का सवाल

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क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत का अधिकार समर्पण कर दिया है?

वर्तमान में, भारत-चीन सीमा पर तनाव का माहौल है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई। यात्रा के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया है। एमआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर केंद्र पर निशाना साधा है।

भारत-चीन विवाद को हल करने के लिए पांच-सूत्री योजना पर सहमति हुई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार शाम मास्को में वार्ता की। इसने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति किसी के हित में नहीं है। दोनों देशों के सैनिकों को वार्ता जारी रखनी चाहिए और तत्काल विघटन शुरू करना चाहिए (विवादित क्षेत्र से सैनिकों की वापसी)। ओवैसी ने इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत का अधिकार समर्पण कर दिया है?

ओवैसी ने कहा, “हमने विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान को देखा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन को अप्रैल से पहले लद्दाख में एलएसी स्थिति में आने के लिए क्यों नहीं कहा? कि वह अपने बॉस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सहमत हैं कि हमारे क्षेत्र में कोई चीनी सैनिक नहीं आया है।

आगे ट्वीट करते हुए ओवैसी ने निशाना साधते हुए कहा, “क्या मोदी सरकार ने 1000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर भारत का अधिकार समर्पित किया है?” ऐसा सवाल पूछते हुए ओवैसी ने मोदी सरकार को एक सलाह भी दी है। उन्होंने कहा, ‘सीमा पर तनाव की स्थिति में चीन निवेश, कूटनीति और बाकी सब कुछ चाहता है। लेकिन भारत को सहमत नहीं होना चाहिए।

भारत-चीन विवाद को हल करने के लिए पांच-सूत्री योजना पर सहमति हुई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार शाम मास्को में वार्ता की। इसने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति किसी के हित में नहीं है। दोनों देशों के सैनिकों को वार्ता जारी रखनी चाहिए और तत्काल विघटन शुरू करना चाहिए (विवादित क्षेत्र से सैनिकों की वापसी)।

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