लॉकडाऊनमें केवल 5% उत्सर्जन घटा , 60% उत्पादन करनेवाले बिजली ,स्टील ,निर्माण व्यापर अब भी शुरू

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लॉकडाऊनमें केवल 5% उत्सर्जन घटा , 60% उत्पादन करनेवाले बिजली ,स्टील ,निर्माण व्यापर अब भी शुरू

लॉकडाऊनमें केवल 5% उत्सर्जन घटा , 60% उत्पादन करनेवाले बिजली ,स्टील ,निर्माण व्यापर अब भी शुरू

लंदन: कोरिना की वजह से पूरी दुनिया में लॉकडाऊन है। संक्रमण के डर से 400 करोड़ लोग अपने घरों में बंद हैं। अर्थव्यवस्था, परिवहन, स्कूल, कॉलेज, व्यवसाय एक ठहराव पर हैं। आकाश कई दशकों के बाद स्पष्ट और नीला दिख रहा है । पर्यावरण में सुधार हो रहा है। लॉकडाउन ने कार्बन उत्सर्जन में 5.5% की कमी की है। इसका मतलब है कि 95% कार्बन अभी भी पर्यावरण में आ रहा है। आप सोच रहे होंगे कि अगर सबकुछ बंद है, तो कार्बन उत्सर्जन कहां से हो रहा है? यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन इस बात पर निर्भर करता है कि अर्थव्यवस्था के कौन से क्षेत्र बंद हैं।

इन कारणों से बिजली का उत्सर्जन कम नहीं हुआ है: बिजली की खपत बढ़ी है। उत्सर्जन का हिस्सा 40% है। नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस स्टडीज के निदेशक डॉ. गेविन श्मिट का कहना है कि बड़ी चुनौतियों को पार किए बिना कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम नहीं किया जा सकता है।

लकड़ी, कोयले का उपयोग: घर को गर्म रखने के लिए और खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला और प्राकृतिक गैस का उपयोग करना शुरू है।

शुद्धि: ऑयल-गैस रिफाइनरियां कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रही हैं। प्राकृतिक गैस और लाइव्हस्टॉक फार्मिंग से भी मीथेन गैस निकलती है।

इंटरनेट: कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। इससे इंटरनेट, बिजली का उपयोग बढ़ा है।

उत्पादन-निर्माण: इसमें 20% कार्बन उत्सर्जन होता है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी स्टील, एल्यूमीनियम और लोहे के उद्योगों में है। महामारी उपकरण, वेंटिलेटर जैसी चीजें बनाना जारी रखा है ।

उत्सर्जन 7.6% घटाने की जरुरत

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन में 5.5% की कमी पर्याप्त नहीं है। जिसप्रकार तापमान बढ़ रहा है उस हिसाब से वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री तक नीचे लाने के लिए , कार्बन उत्सर्जन को अगले दस वर्षों में सालाना 7.6% कम करने की आवश्यकता है।

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