सामना : क्या ये है मोदी सरकार की रणनीति चीन के खिलाफ?

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मुंबई: ‘हमारे देश के कई राजनीतिक दल और नेता विदेशों के लाभार्थी हैं। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं। बीजेपी द्वारा इस बारे में बात करना कीचड़ में पत्थर फेंकने और अपने ही शरीर पर छींटे फेंकने जैसा है। हम्माम में सब नंगे हैं । भाजपा कभी भी कांग्रेस पार्टी से लड़ सकती है। लेकिन आज हमें चीन से लड़ना है। इसके बारे में बात करें, ‘शिवसेना ने मोदी सरकार पर तंज कसा है ।

सामना : क्या ये है मोदी सरकार की रणनीति चीन के खिलाफ?

लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी हमले में 20 भारतीय सैनिक मारे जाने के बाद से कांग्रेस मोदी सरकार को घेर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी रोजाना नए सवाल पेश कर सरकार को को मुश्किल में डाल रहे हैं । जवाब में, भाजपा ने कांग्रेस को चीनी धन का मुद्दा उठाया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को दिल्ली में एक चीनी वकील से भारी दान मिला। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के पहले पन्ने पर यह टिप्पणी की गई है। ‘अभी चीन के साथ लड़ाई का सवाल महत्वपूर्ण है। गालवन घाटी में चीन ने नया निर्माण शुरू किया है। उसके सैनिक अरुणाचल, सिक्किम के रास्ते पर तेज़ हो रहे हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि राजनीतिक पक्षपात को को किनारे करके एकसाथ आया जाये यह सलाह संपादकीय में दी गई है । ‘यह संकट भाजपा या कांग्रेस पर नहीं है; यह संकट पुरे देश पर है । पूरे देश की प्रतिष्ठा और छवि धूमिल हुई है। चीन एक गद्दार है और इसकी साजिशें हमेशा के लिए जारी रहेंगी, लेकिन इन साजिशों को रोकने के लिए हमारी क्या योजना है?ऐसा सवाल शिवसेना ने पूछा है ।

राजीव गांधी फाउंडेशन ने दिल्ली में एक चीनी वकील से भारी दान प्राप्त किया। क्या बीजेपी द्वारा चंदा देने से चीन की सीमा पर आवाजाही प्रतिबंधित हो जाएगी? यदि राजीव गांधी फाउंडेशन को दिए गए दान चीनी घुसपैठ या हमारे 20 सैनिकों के शहीद होने की घटनाओं से संबंधित हैं, तो भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए, ‘शिवसेना ने भी चुनौती दी है।

क्या ये है मोदी सरकार की रणनीति चीन के खिलाफ?

“भारत के रक्षा मंत्री ने रूस का दौरा किया है और वहां से वह हथियारों और गोला-बारूद (ब्रह्मास्त्र) का लाने आदेश देने जा रहे हैं। दिल्ली में भाजपा नेता चीन पर मौखिक हमले कर रहे हैं। इसलिए उन्हें लगता है कि सीमा पार घूम रहे लाल बंदर दहशत में भाग जाएंगे। सरकार के हितैषी मीडिया और सोशल मीडिया पर खाली सेनाएँ “चीन के पीछे हटने या भारतीय कूटनीति के सामने आत्मसमर्पण” करने की ख़बरों से लोगों को भ्रमित कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रश्न पूछनेवाले लोगों को आरोपियों के पिंजरे में रखा जा रहा है और उन पर चीनी हस्तक या दलाल होने का आरोप लगाया जा रहा है, ‘शिवसेना ने तंज कस्ते हुए पूछा है की क्या यह चीन के खिलाफ मोदी सरकार की युद्ध रणनीति है?

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